20 मार्च, 2019

चुनावी मौसम की रंगत

आज सुबह पार्क में घूमने के बाद हम कुछ मित्र आपस मे बात कर रहे थे तो एक जनाब बोले, चुनाव की तारीखें घोषित हो गयी हैं तो सोच समझ के वोट देना.. मैंने कहा, बिल्कुल हम तो राष्ट्रहित में ही वोट करेंगे, वो बोले, अच्छा मोदी भक्त हो, मैंने कहा, यानी आप भी ये मानते हो कि केवल मोदी और उसके भक्त ही राष्ट्रहित की बात करते हैं, वैसे आप कौन से वाले चमचे हो ? बिदक गए जनाब, कहा, हम कांग्रेसी नही, वो तो भाजपा से मिली हुई है, हम तो आपिये हैं। मैंने कहा, कांग्रेसी तो चमचे हैं लेकिन आपिये तो बेचारे प्लास्टिक के डिस्पोसेबल चमचे हैं जिनको इस्तेमाल के वाद तोड़ के फैंक दिया जाता है, ये तो साले रीसायकल के लायक भी नही रहते... जनाब और ज़्यादा बिदक गए, लगे वही हमने स्कूल बनवाये, हॉस्पिटल बनवाये, बिजली हाफ पानी माफ वगैहरा वगैहरा, तो फिर हम भी तो एक फ़क़ीर के भक्त है, खोला अपना पिटारा और दिखा दिए सवूत, अब ये तो आंकड़े है, कागज़ हैं, फोटो है, सच्चाई है, जनाब लगे बगलें झांकने, सिट्टी पिट्टी गुम औऱ सदमे में बड़बड़ाना शुरू, ओर फिर कांग्रेसी व आपिये के गठबंधन का समावेश करते हुए 15 लाख, राफाल और सेना पर सवाल, तो करो ना भाई, सवूत तो यहाँ भी है, दे मारे.. तभी अचानक उनके फ़ोन की घंटी बजी, बात की, और जनाब बीवी का फ़ोन आने की कहकर खींसे निपोरते हुए निकल लिए... ज़रूरी तो नही राष्ट्रहित के लिए आप पड़ोसी दुश्मन से ही लड़ो, उसके लिए तो हमारी सेना है लेकिन घर मे वैठे भटके हुए नौजवानों को रास्ते पर लाना तो हमारा ही काम है, बातों से मान गए तो ठीक नही तो सर्जिकल स्ट्राइक...